सिलावट से भाजपाई को मिलेगा लाभ

मध्यप्रदेश की सत्ता में चौथी बार मुख्यमंत्री की कुर्सी पर काबिज हुए शिवराज सिंह के लिए इस बार मंत्रिमंडल का गठन करना बेहद चुनौती भरा साबित हो रहा है। मंत्रिमंडल में शामिल होने वाले दावेदारों की संख्या ज्यादा होने से एक अनार-सौ बीमार के समान हालात बन रहे हैं। अब यदि इंदौर संभाग की बात करें, तो यहां मंत्री बनने वाले दावेदारों की कमी नहीं है। आधा दर्जन भाजपा नेता ऐसे हैं, जो मंत्री बनने के प्रबल दावेदार हैं, लेकिन इनकी राह में सिंधिया समर्थक तुलसी सिलावट रोड़ा बन सकते हैं। ऐसे में सवाल है कि क्या इस बार सिलावट की गोटियों में शिवराज मंत्रिमंडल में भाजपा को मौका मिल पाएगा?
दरअसल, प्रदेश मंत्रिमंडल में इंदौर संभाग का भाजपाई नेतृत्व इसलिए भी अब मिलना जरूरी है कि, पिछले विधानसभा चुनाव में इस संभाग से भाजपा को अप्रत्याशित हार का सामना करना पड़ा था। आदिवासी बाहुल्य जिले धार, झाबुआ, खरगोन, बड़वानी में भाजपा को इक्का-दुक्का सीटें ही मिल पाई थीं। हां, खंडवा जिले में जरूर भाजपा का कुछ बेहतर प्रदर्शन रहा था। भाजपा के सूत्रों का कहना है कि इंदौर संभाग में भाजपा के ही ऐसे कद्दावर विधायक मंत्री बनने का दावा कर रहे हैं। इन्हें शिवराज के पूर्ववर्ती कार्यकाल में मंत्री बनाया जाना लगभग तय हो गया, लेकिन तब पार्टी की अंदरूनी खीचंतान में ये मंत्री नहीं बन पाए थे, लेकिन अब सिंधिया समर्थकों ने उनकी राह में रोड़े डाल रखे हैं।
तुलसी और दत्तीगांव प्रबल दावेदार
इंदौर की बात करें तो सिंधिया समर्थक तुलसी सिलावट और धार जिले की बात करें तो सिंधिया समर्थक राजवर्धन सिंह दत्तीगांव मंत्री बनने के प्रबल दावेदार हैं। उनका शिवराज मंत्रिमंडल में मंत्री बनाया जाना लगभग तय माना जा रहा है।
भाजपा से ये हैं दावेदार
भाजपा के दावेदारों में इंदौर से तीन बार के विधायक एवं भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री कैलाश विजयवर्गीय के खास रमेश मेंदोला, पूर्व मंत्री महेंद्र हार्डिया, पूर्व महापौर मालिनी गौड़ और विधायक उषा ठाकुर भी अपना दावा मजबूत किए हुए हैं। इसके अलावा धार जिले में विक्रम वर्मा की पत्नी नीना वर्मा भी तीन बार की विधायक हो गई हैं। खंडवा में पूर्व मंत्री विजय शाह आदिवासी समाज का प्रतिनिधित्व करते हैं। वे भाजपा शासनकाल में लगातार मंत्री रह चुके हैं।
ये भी कर रहे दावेदारी
सूत्रों के अनुसार इस बार मंत्री बनने के लिए इंदौर संभाग से आरक्षित वर्ग से देवेंद्र वर्मा भी दावेदार माने जा रहे हैं। मंत्रिमंडल में विजय शाह को लेना जातीय समीकरण के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण है।
असमंजस की स्थिति
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के लिए असमंजस की स्थिति यह है कि इंदौर संभाग जिसमें मालवा-निमाड़ आता है और वह भाजपा की ताकत है। इस क्षेत्र में पार्टी को पुन: खड़ा करने के लिए जरूरी है कि यहां के विधायकों को मंत्रिमंडल में ज्यादा से ज्यादा स्थान मिले। लेकिन मुख्यमंत्री के सामने सिंधिया समर्थकों की वजह से मंत्रिमंडल में किसे लें और किसे छोड़े की स्थिति बनी हुई है।
उपचुनाव भी होना है
इंदौर संभाग की दो विधानसभा सीटों सांवेर और बदनावर में आने वाले दिनों में उपचुनाव भी होना है। ऐसी स्थिति में पार्टी को एकजुट रखना भी बड़ी चुनौती है। रमेश मेंदोला जिनका जनाधार बहुत व्यापक है। मेंदोल को पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री कैलाश विजयवर्गीय का समर्थक माना जाता है। उनको मंत्री बनाने को लेकर भी चर्चा हुई थी, लेकिन वे मंत्री नहीं बन पाए । पार्टी की इसी खींचतान में पिछली बार भी इंदौर से कोई मंत्री नहीं बन सका था।

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