क्या एक बार फिर उपचुनाव के बाद मध्यप्रदेश में होगा सत्ता का उलटफेर

मध्य प्रदेश वासियों के साथ ही समस्त देशवासियों को मार्च के महीने में मध्यप्रदेश में एक बड़ा पॉलिटिकल ड्रामा देखने को मिला जिसका नतीजा यह निकल कर सामने आया कि एक बार फिर शिवराज सिंह चौहान चौथी बार मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री बने और कांग्रेस के पूर्व कद्दावर नेता और मध्य प्रदेश के महाराज कहे जाने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया भाजपा में सम्मिलित हो गए भाजपा जहां मध्यप्रदेश में और ताकतवर हो गई वहीं कांग्रेस को सिंधिया के जाने का एक बहुत बड़ा नुकसान भी हुआ है परंतु एक बड़ा सवाल यह भी सामने है की अब जिन खाली सीटों पर मध्यप्रदेश में उपचुनाव होने हैं क्या उन उपचुनाव होने के बाद मध्यप्रदेश में एक बार फिर कोई सियासी उलटफेर देखने को मिलेगा क्योंकि मध्यप्रदेश में कमलनाथ ने 15 महीने तक सरकार चलाई और इसके बाद शिवराज फिर मुख्यमंत्री बन गए अब देखना काफी दिलचस्प होगा की पल-पल बदलते हुए मध्य प्रदेश की राजनीति के रंग का फिर से कोई नए तेवर दिखायँगे।

सीटो का गणित-

कहा जाता है कि राजनीति में जिसने अंकगणित अर्थात सीटो के गणित को समझ लिया वह सरकार आसानी से चलाता भी है और वह सरकार बनाता भी है इसी सीटों और अंक गणित के चारों ओर घूमते हुई मुख्यमंत्री की कुर्सी पर अभी शिवराज सिंह चौहान विराजमान है यदि सीटों के गणित को समझें तो मध्य प्रदेश में कुल विधानसभा की 230 सीटें हैं वर्तमान में अभी भारतीय जनता पार्टी के पास 230 सीट में से 107 सीटें हैं जबकि विपक्षी दल कांग्रेस के पास वर्तमान में 92 सीट है । मध्य प्रदेश की जनता ने बहुत भली-भांति समझ चुकी है कि जिधर सत्ता का तराजू झुकेगा उधर ही निर्दलीय चलेगा अर्थात जब कमलनाथ सरकार में थे तो निर्दलीय कमलनाथ के साथ थे और अब भाजपा की सरकार बन गई है तो निर्दलीय भाजपा के साथ हो गए है यदि बात करे कांग्रेस की तो कांग्रेस के पास केवल दो निर्दलीय विधायक है।

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मध्य प्रदेश में कुल 24 सीटों पर उपचुनाव होना है जबकि सरकार बनाने के लिए जादुई आंकड़ा 116 पर है अर्थात भारतीय जनता पार्टी को यदि सरकार बचाना है तो इन 24 सीटों में से केवल 9 सीटें जीतना है और इसके उलट कांग्रेस को यदि सरकार बनाना है कांग्रेस को 24 में से 24 सीटें जीतना ही होगी यदि पूर्ण बहुमत की सरकार बनाना है और यदि तोड़ जोड़कर सरकार बनाना चाहते हैं तो भी 17 सीटों को जीतना होगा और तब भी सत्ता के लिए संघर्ष करना पड़ेगा वहीं भारतीय जनता पार्टी उपचुनाव में काफी मजबूत नजर आ रही है ज्यादातर उन सीटों पर उपचुनाव होना है जहां पर ज्योतिरादित्य सिंधिया का दबदबा है अब यह देखना बहुत दिलचस्प होगा कि महाराज के सामने राजा साहब आते हैं या फिर कमलनाथ जी आते हैं या कोई अन्य चेहरा कांग्रेस ज्योतिरादित्य सिंधिया के खिलाफ उतारती है क्योंकि वर्तमान में कांग्रेस पार्टी ने अपनी रणनीति में बदलाव किया है कांग्रेस ने अपना प्रदेश प्रभारी बदला है उन्होंने नए प्रदेश प्रभारी के रूप में मुकुल वासनिक को नियुक्त किया है माना जा रहा है कि यह कांग्रेस की उप चुनाव की रणनीति के तहत किया गया निर्णय है अब यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा की भाजपा उपचुनाव में बाजी मारती है या फिर कांग्रेस एक तरफा मात देकर सत्ता में वापस आती है।

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