ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इसलिए छोड़ी कांग्रेस, जानिए ‘अंदर की बात’

18 साल कांग्रेस में बिताने के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने पार्टी से किनारा कर लिया। सिंधिया के इस फैसले ने सबको हैरान कर दिया। लोगों में इस बात को लेकर जिज्ञासा है कि आखिर क्यों उन्होंने यह फैसला लिया। हमने इसकी वजह जानने की कोशिश की है।

सिंधिया के इस फैसले के पीछे कई वजहें थी।इसमें राज्य सरकार की तरफ से किसानों और युवाओं को किये वादे पूरा न करना भी है। ये दोनों वर्ग सिंधिया के कट्टर समर्थक हैं. इसके अलावा राज्यसभा सीट मिलना पक्का न होना और राज्य में पार्टी की कमान न मिलना शामिल हैं।

सिंधिया के करीबी नेताओं ने हमारे सहयोगी अखबार ईटी को बताया कि कांग्रेस के अपने चुनावी घोषणापत्र में किए गए वादों को पूरा नहीं करने से सिंधिया काफी निराश थे। एक नेता ने कहा, ‘राहुल गांधी ने घोषणा की थी कि राज्य में सरकार बनने के 10 दिनों के अंदर सभी किसानों के कर्ज माफ किए जाएंगे और बेरोजगार युवाओं को भत्ता मिलेगा।

कमल नाथ सरकार ने भत्ता नहीं दिया और किसानों के 36,000 करोड़ रुपये के कर्ज माफ करने के वादे में से आधा भी पूरा नहीं हुआ। इससे युवाओं और किसानों के बीच गुस्सा है और ये सिंधिया के बड़े समर्थक हैं।”

सिंधिया ने बुधवार को बीजेपी मुख्यालय में अपने संबोधन में इन मुद्दों का जिक्र किया था। उन्होंने किसानों के खिलाफ मंदसौर में फायरिंग से जुड़े मामलों को भी अभी तक वापस नहीं लेने की बात कही थी। एक अन्य नेता ने कहा, ‘राहुल गांधी ने जून 2018 में कमल नाथ और सिंधिया की मौजूदगी में मंदसौर से राज्य में चुनाव प्रचार की शुरुआत की थी।किसानों को राहत देने का वादा किया था। ईटी को पता चला है कि सिंधिया ने कुछ महीने पहले दिल्ली में कांग्रेस नेतृत्व के सामने इन मुद्दों को उठाया था. लेकिन उसका कोई फायदा नहीं हुआ।बीजेपी इन मुद्दों पर राज्य सरकार को निशाना बना रही थी।

मध्य प्रदेश में 2018 से पार्टी का नेतृत्व सिंधिया को देने में आनाकानी करना भी एक दूसरा कारण था। सिंधिया ने विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित करने की मांग की थी।लेकिन मध्य प्रदेश में कांग्रेस के तत्कालीन अध्यक्ष अरुण यादव ने इसका विरोध किया था। पार्टी ने बाद में यादव के स्थान पर कमलनाथ को राज्य कांग्रेस की जिम्मेदारी दी थी।कमलनाथ ने इसे मुख्यमंत्री के लिए उनके चयन का संदेश माना था।

सिंधिया की राज्यसभा सीट भी पक्की नहीं दिख रही थी। विधानसभा चुनाव से पहले इंदौर में एक प्रेस कांफ्रेस में पत्रकारों ने राहुल गांधी से कमलनाथ और सिंधिया की मौजूदगी में पूछा गया था कि वह दोनों के बीच सीएम का चेहरा क्यों तय नहीं कर रहे हैं।इस समय राहुल गांधी ने जबाव दिया था कि मुझे उनमें से एक का चयन क्यों करना चाहिए? एक अनुभवी है, दूसरा युवा और सुंदर है।उस समय कमलनाथ और सिंधिया दोनों ने हंस पड़े थे। इस तरह से पार्टी और महारज के बीच दरार बढ़ती गई और आखिरकार सिंधिया ने कांग्रेस से किनार कर लिया।

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