…तब दिग्गी राजा नहीं, फूल सिंह होंगे मध्यप्रदेश से राज्यसभा के लिए कांग्रेस की पहली च्वाइस!

ग्वालियर चंबल को साधने कांग्रेस की बदली रणनीति

मध्य प्रदेश की सत्ता कांग्रेस के हाथ से भले ही निकल गई है लेकिन पार्टी इस कोशिश में लगी हुई है कि वह 24 विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव में अधिक से अधिक सीटें जीतकर सत्ता में वापसी कर ले। इसके लिए पार्टी के रणनीतिकार विभिन्न स्तरों पर रणनीति बना रहे हैं

इसमें से एक कोशिश यह है कि राज्यसभा के चुनाव में फूलसिंह बरैया को पहली प्राथमिकता देते हुए उन्हें जिताकर सांसद बनाया जाए। ताकि उनके माध्यम से ग्वालियर चंबल संभाग की 16 विधानसभा सीटों को साधा जा सके। फूल सिंह बरैया दलित राजनीति के बड़े चेहरे माने जाते हैं। ग्वालियर चंबल संभाग के दलित वर्ग में उनकी अच्छी पैठ है। लिहाजा उन्हें राज्यसभा में भेजने से कांग्रेस को बड़ा फायदा हो सकता है। इसलिए पार्टी के रणनीतिकार इस प्रयोग पर विचार कर रहे हैं। ज्ञात हो कि राज्य में राज्यसभा की तीन सीटों के लिए चुनाव हो रहे हैं। वर्तमान विधायकों की संख्या के आधार पर एक सीट कांग्रेस और दो सीट भाजपा के खाते में जानी है। कांग्रेस ने दो उम्मीदवार दिग्विजय सिंह और फूल सिंह बरैया को मैदान में उतारा है। पहली प्राथमिकता पर दिग्विजय सिंह और दूसरी प्राथमिकता पर फूल सिंह बरैया का नाम है। प्रदेश में सत्ता हाथ से निकलते ही कांग्रेस के सियासी गणित बदलने लगे हैं। कांग्रेस नेता राज्य में दलित वोट बैंक को मजबूत करना चाहते हैं, जिसके चलते हाईकमान से राज्यसभा चुनाव में पहली प्राथमिकता पर दलित नेता फूल सिंह बरैया का नाम लाने के लिए पार्टी हाईकमान को प्रस्ताव भेजने का निर्णय लिया है। ज्यादातर कांग्रेस नेता हाथ से सत्ता जाने से दुखी हैं और कांग्रेस की वापसी के लिए हरसंभव प्रयास कर रहे हैं। कांग्रेस के कुछ दिग्गज नेताओं ने राज्यसभा उम्मीदवार फूल सिंह बरैया के पक्ष में एक पत्र लिखा है। इस पत्र में नेताओं ने अनुसूचित जाति और जनजाति के वोट बैंक का फायदा लेने के लिए बरैया को प्राथमिकता क्रम में पहले नंबर पर रखकर उन्हें राज्यसभा में भेजने की मांग की है। बरैया के राज्यसभा में जाने से कांग्रेस को उपचुनाव में अनुसूचित जाति और जनजाति वोट बैंक का लाभ मिलेगा

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