अदभुत शक्ति व पराक्रम, शिक्षा एवं शास्त्र के ज्ञाता परशुराम अदभुत, अविश्वसनीय, अतुल्नीय

अद्भुत साहस अद्भुत अविश्वसनीय अतुलनीय शक्ति के परिचायक शक्ति के परमात्मा के रूप में जाने जाने वाले लोक परलोक में अपनी ख्याति से प्रसिद्ध भगवान परशुराम जी का जन्म दिवस का अवसर हैं। बहुत कम ऐसे सनातन धर्म के लोग होंगे और भगवान विष्णु के अवतार माना जाता है कि वह स्वयं कल्कि का अवतार धारण करें और लोगों का उद्धार करेंगे।

शिक्षा और शास्त्र दोनों को मानने वाले अपने कर्म पर विश्वास रखने वाले पूजनीय व्यक्तियों का सम्मान करने वाले और साधु संत और ब्राह्मणों की मान सम्मान करने वाले लोगों के मन में परशुराम जी के प्रति सादर सादर परशुराम जी शिक्षा के क्षेत्र में अतुलनीय अविश्वसनीय वृद्धि की और शास्त्र के क्षेत्र में भी अभी जिस को मार्शल आर्ट कहा जाता है उसके जन्मदाता भगवान विष्णु के छठवें अवतार ब्राह्मण कुल शिरोमणि परशुराम ही माने जाते है।

अदभुद क्रोध व आत्मसम्मान के प्रतीक

जिस प्रकार से हर एक का अपना कहना होता है जो उसकी सुंदरता में चार चांद लगाने में मदद करता है उसी प्रकार से भगवान परशुराम का भी अपना ही गहना है जिसको कई लोग आलोचना के रूप में लेते हैं तो कई लोग इसको सजगता और मान सम्मान के प्रति के दृष्टिकोण से देखते हैं भगवान परशुराम अद्भुत क्रोध के परिचय माने जाते हैं कहा जाता है कि जब धरती पर क्षत्रिय लोगों का प्रकोप बढ़ा तो भगवान परशुराम ने उस क्रोध के चलते संपूर्ण पृथ्वी को क्षत्रिय विहीन कर दिया। और कई बार संपूर्ण पृथ्वी पर एकात्मक राज्य कर कर ब्राह्मणों को दान कर दिया।

ऐसा माना जाता है कि जब भी धरती पर अन्याय का प्रकोप बढ़ने लगता है और पापों का घड़ा भरा जाता है तो भगवान उसे क्रोधित होकर उस अन्याय और पाप के घड़े को फोड़ने के लिए पृथ्वी पर जन्म लेते हैं इसी प्रकार से जब एक समय जब क्षत्रियों का प्रकोप संपूर्ण पृथ्वी पर पड़ने लगा मैं पाप बढ़ने लगे तब स्वयं नारायण विष्णु भगवान क्रोधित हो उठे और उन्होंने क्रोध में पाप और अन्याय का नाश और न्याय की स्थापना के लिए परशुराम भगवान के रूप में जन्म लिया।

भगवान परशुराम जी ने सदैव अपने माता पिता को अपना भगवान माना ओर समाज मे एक मिसाल पेश की वह सदैव अन्याय के खिलाफ क्रोधित व्यक्ति माने जाते है वही न्याय प्रिय व्यक्तिव के धनी के रूप में व्याख्यात हैं।

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