कोरोना- आर्थिक व स्वास्थ्य संबंधी विश्लेषण आखिर भारत से क्या गलती हुई है!

Analysis by- Mayank Sharma

“कोरोना महामारी से सम्पूर्ण विश्व मे कहर बरपा रहा है ऐसा कोई देश अछूता नही है जिसको कोरोना ने जकड़ा न हो लगातार मौतों की कतार बढ़ती ही जा रही हैं। कोरोना ने पूरे विश्व मे आर्थिक गतिविधियों को चुरमुरा दिया हैं। कोरोना तो अस्थाई है, परंतु किसी भी देश की आर्थिक गतिविधि ओर सदृढ़ता स्थाई होती है।

एक भी दिन के आर्थिक गतिरोध में कमी आ जाने से देश महीनों पीछे चला जाता है लेकिन जब देश मे महीनों आर्थिक गतिविधि ठप हो गई है तो आसानी से समझा जा सकता हैं की देश सालो पीछे चला गया हैं। दुनिया मे अलग अलग देश आज एक दूसरे की मदद करने में हिचकिचा रहे है जिनमे स्वास्थ्य व खाद्य सामग्री आदि की मदद जिसकी आवश्यकता सर्वाधिक है उसकी मदद करने के लिए केवल चुनिंदा देश ही मदद के लिए सामने आए हैं।

भारत की वह गलतियां जिसने कोरोना के कहर को बढ़ाया-

1. विदेशी नागरिकों को रोकने में देरी- भारत सरकार के संज्ञान में कोरोना जैसी खतरनाक महामारी की जानकारी भली भांति बहुत अच्छी तरह थी फिर भी भारत सरकार ने विदेशी नागरिकों के भारत मे प्रवेश पर प्रतिबंध समय रहते नही किया खासकर इटली ओर ईरान जैसे देश जो कि कोरोना से सर्वाधिक प्रभावित थे वहां के नागरिको पर भारत मे प्रवेश पर प्रतिबंध में लापरवाही की गई।

2. पर्यटकों पर रोक में विलंब– भारत की आय का एक बहुत बड़ा स्त्रोत पर्यटन के कारण आता है, परंतु ऐसी स्थिति में जब सरकार चिर परिचित अंदाज में कोरोना वायरस से परिचित थी तब समय रहते हुए विदेशी पर्यटकों के आगमन पर भारत में प्रतिबंध लगाने में इतनी देरी क्यों की गई क्योंकि हमने देखा था कि जब राजस्थान में शुरुआती कोरोनावायरस के केस सामने आए थे तो वह इटली से आए हुए सैलानी ही थे जिन्होंने राजस्थान में कोरोना का भीषण संक्रमण फैल आया था।

3. विदेशी यात्रा को रोकने में देरी- देश में लॉक डाउन के पश्चात समस्त विदेशी यात्राओं पर रोक लगा दी गई के साथ ही साथ विदेशी यात्रियों के वीजा रद्द करने का बड़ा फैसला भी सरकार ने दिया परंतु इस फैसले को लेने में सरकार ने देवी दिखाई जिसकी वजह से कोरोना ने भारत में पैर फैलाए।

4.भारतवंशियों को भारत मे लाने में देरी की गई- सरकारों ने भारतवंशियों को भारत लाने में देरी कर दी जिसके कारण विदेश में रह रहे कई भारतवंशी कोरोना वायरस किस प्रकोप की घड़ी में कोरोना वायरस की चपेट में आ गए जब वह भारत में आए तो उन्होंने कई लोगों को इस कोरोना वायरस की चपेट में ले लिया जो कोरोनावायरस की फैलने की एक बहुत बड़ी वजह बनकर सामने आई।

5. लॉक डाउन में थोड़ी सी देरी– हालांकि भारत ने विश्व में दूसरे देशों के मुकाबले लॉक डाउन समय पर लागू किया परंतु भारत ने भारत की आबादी भारत के स्वास्थ्य सुविधाओं को मध्य नजर रखते हुए इस लॉक डाउन को लागू करने में थोड़ी सी देर तो कर दी थी जिसके कारण भारत में भी कोरोना वायरस का फैलाव इतनी तेजी से हुआ है।

6. शुरुआती लापरवाही- कोरोना वायरस का संक्रमण जब शुरुआत में चीन में ही आया था तब भी भारत में कहीं ना कहीं एयरपोर्ट पर लापरवाही की गई जिसके कारण स्क्रीनिंग सही रूप से नहीं हो पाई जिससे कई विदेशी नागरिक जो कोरोनावायरस से प्रभावित थे उनका प्रवेश भारत में हो गया जिससे कोरोनावायरस का फैलाव तेजी से हुआ।

7. Quarantine का अभाव- शुरुआती दौर में जब कोरोनावायरस नया-नया आया था तब भारतवंशी लोग जो विदेशी से आ रहे थे जो पहले ही कोरोना वायरस की चपेट में आ चुके थे परंतु स्क्रीनिंग में वह कोरोनावायरस के मरीज की श्रेणी में नहीं आ रहे थे उन लोगों को शुरुआत में Quarantine करने में कहीं ना कहीं एक बड़ी लापरवाही सामने आई हालांकि बाद में वह भारतवंशी जो विदेश में रहकर पढ़ रहे थे, अथवा नौकरी पेशा और बिजनेस के लिए विदेश गए थे वह लोग जब भारत वापस लौटे तो उनकी क्वॉरेंटाइन की व्यवस्था सरकार द्वारा उचित रूप से की गई थी परंतु शुरुआती दौर में इसकी लापरवाही भारत पर भारी पड़ गई।

कोरोना के फैलाव को कैसे रोका जा सकता है और कैसे आर्थिक कमजोरी को किया जा सकता है दूर-

1. केंद्रीय कमेटी का गठन- भारत सरकार को एक केंद्रीय कमेटी की गठन करने की आवश्यकता है जो जिले कोरोनावायरस के हॉटस्पॉट है वहां पर केंद्रीय कमेटी का गठन करने की आवश्यकता है जहां पर केंद्रीय कमेटी उन जिलों पर देखरेख रखें और जहां बड़ी चूक सामने निकल कर आए वहां राज्य सरकारों के समक्ष उन चूको को प्रकट करें और उसमें संलग्न लोगों के ऊपर उचित कार्यवाही की व्यवस्था की जाए जिससे लॉक डाउन भलीभांति से लागू किया जा सके और लोगों को कोरोना वायरस से बचाया जा सके।

2.ड्रोन से की जाए हॉटस्पॉट इलाको की निगरानी- प्रशासन द्वारा ड्रोन से हॉटस्पॉट इलाकों की निगरानी की जाए जिससे वहां कानून-व्यवस्था और उसके साथ-साथ लोग डाउन लागू करने में काफी सहायता प्राप्त होगी और हॉटस्पॉट एरिया में कोरोना वायरस के केस में कमी आ सके ड्रोन से सैनिटाइजेशन का काम हॉटस्पॉट एरिया में किया जाए हमने देखा है कि राजस्थान के कुछ इलाकों में ड्रोन के द्वारा ही स्क्रीनिंग करने का काम किया गया जिसमें हमारे स्वास्थ्य कर्मियों को काफी सहायता प्राप्त हो रही है उसका काम भी तेजी से सभी वह हॉट स्पॉट एरिए में किया जाए जो इस देश में है।

3. गावो को किया जाए सील- ग्रामीण क्षेत्रों में माना जा रहा है कि यदि कोरोना वायरस का केस आता है तो वह पूरे गांव की नैया को ले डूबेगा परंतु यदि गांव में सावधानी रखी जाए तो वह कभी डूब नहीं सकता है जो गांव हॉटस्पॉट के करीबी पर है उन गांवों को स्वयं सतर्कता रखने की आवश्यकता है प्रशासन द्वारा पुलिस की एक विशेष कमेटी का गठन किया जाए और गांव में जाकर मीटिंग लेकर वहां के लोगों से अनुरोध किया जाए कि गांव को पूर्ण रूप से सील करे।

4.आपातकालीन आर्थिक शोध- कोरोना वायरस से लॉक डाउन के कारण आर्थिक रूप से भारत को बहुत अधिक क्षति पहुंची है इस आर्थिक क्षति को उपचार हेतु आपातकालीन आर्थिक शोध की आवश्यकता है जिसमें न केवल सरकारी क्षेत्र के अर्थशास्त्री बल्कि बड़ी-बड़ी निजी कंपनियों के अर्थशास्त्री और उसके साथ-साथ संपूर्ण विश्व में भारत की हितों की कामना करने वाले भारतवंशी अर्थशास्त्री जो अपनी बुद्धि के बल पर संपूर्ण विश्व में डंका बजा रहे हैं उनको साथ लेकर देश में आर्थिक आपातकाल जैसे हालातों पर शोध करने की आवश्यकता है और इस बात की शोध करने की भी आवश्यकता भी है कि भारत में यदि कोरोनावायरस का खतरा कम होता है तो किस प्रकार से भारत की आर्थिक नीति रहेगी और यदि भारत दुनिया से सबसे पहले कोरोना वायरस के खतरे से उभरता है तो किस प्रकार से वह दुनिया को पछाड़ते हुए भारत लगातार आर्थिक गतिविधियों में दुनिया का नेतृत्व करें और देश की अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करें और संपूर्ण विश्व के सामने एक उदाहरण बन कर सामने आए कि किस प्रकार से आर्थिक आपातकाल जैसे हालातों से निकलकर कोई देश जिसकी आबादी सवा सौ करोड़ है वह किस प्रकार से आर्थिक स्टार बनकर दुनिया के सामने प्रस्तुत हुआ है।

5. सावधानपूर्वक ओपन की जाए आपातकालीन दवा उघोग- भारत के पास एक बहुत बड़ा मौका है कि वह दुनिया में मेडिकल इमरजेंसी जैसे हालातों के बीच भी दुनिया को मेडिकल सप्लाई करें और अपनी मेडिकल क्षेत्र में की गई तरक्की को दुनिया के पटल पर रखे जिससे भारत की आर्थिक सुदृढ़ता भी होगी और दुनिया में भारत की पहचान एक नए रूप में भी बढ़ेगी सावधानीपूर्वक जिन दवाइयों की आवश्यकता कोरोनावायरस की जंग की घड़ी में न केवल भारत को बल्कि संपूर्ण विश्व को है उन क्षेत्रों की मेडिकल फैक्ट्री को चालू करने की आवश्यकता है ना केवल सरकारी क्षेत्र की फैक्ट्रियां बल्कि प्राइवेट क्षेत्र की भी जो फैक्ट्रियां भी जिनकी आवश्यकता दुनिया को कोरोनावायरस की इस लड़ाई में लड़ने के लिए पड़ सकती है उन फैक्ट्रियों को सावधानीपूर्वक ओपन किए जाना चाहिए जिससे भारत स्वयं तो कोरोनावायरस से लड़ ही सकेगा परंतु वह संपूर्ण विश्व को इस लड़ाई में हथियार देगा जिससे पूरा विश्व कोरोनावायरस की लड़ाई को जीत सकें।

6.युथ आइकॉन को मेडिकल फ़ील्ड को मौका देना- youth icon of medical field जिस बात की घोषणा स्वयं देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की थी जिसमें उन्होंने कहा था कि मैं आव्हान करता हूं उन सभी युवाओं से जो मेडिकल फील्ड के जानकार हैं और कोरोनावायरस पर रिसर्च कर रहे हैं मैं चाहता हूं कि वह आगे आए और कोरोना वायरस की इस लड़ाई में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई परंतु उन युवाओं की आवश्यकता भी पूरी की जानी चाहिए जिससे वह कोरोनावायरस की वैक्सीन बनाने में कामयाब हो और यूथ आईकॉन ऑफ मेडिकल फील्ड की बातें भी ठीक उसी प्रकार सुनी जानी आवश्यक है जिस प्रकार एक वरिष्ठ चिकित्सक की बात सुनी जाती है।

निष्कर्ष- कोरोना वायरस की समस्या कोई स्थाई समस्या नहीं है यह एक अस्थाई समस्या है एक न एक दिन पूरी दुनिया इस जंग में जीत जाएगी परंतु आवश्यकता है कि प्रत्येक परिस्थिति का सामना उचित समय रहते ओर उसका सदुपयोग किया जाए आज भारत भले ही कोरोनावायरस की जंग लड़ रहा हो परंतु भारत में कोरोना वायरस के संक्रमण का खतरा दुनिया से बहुत कम है जो भारत के लिए एक बहुत बड़ा पॉजिटिव पॉइंट है और जिस से उसको काफी मदद भी प्राप्त हो रही है भारत के पास वह दवाइयां है उन दवाइयों की फैक्ट्रियां है जिनकी आवश्यकता इस संकट की घड़ी में विश्व को है भारत के पास वह संसाधन है , भारत के पास वह नीतियां है जिससे वह न केवल भारत में बल्कि संपूर्ण दुनिया में कोरोनावायरस की इस खतरे की घड़ी में इस खतरे को रोक सकता है परंतु आवश्यकता है कि उन बातों पर पूर्ण रूप से अमल जो सरकारी नियमो का नियम का उल्लंघन करें लॉक डाउन का उल्लंघन करें उनके ऊपर उचित कार्यवाही की जाए और न केवल उचित कार्यवाही की जाए बल्कि नियमों का उल्लंघन करने पर चालान भी बनाए जाए सख्ती से किसी भी नियम का पालन किया जाए और यदि उस नियम का पालन करने में या करवाने में कहीं कोई भी त्रुटि सामने निकल कर आए तो तुरंत उस त्रुटि पर काम किया जाए आर्थिक रूप से अथवा यातायात के साधनों के कारण जो लोग प्रभावित हैं उन लोगों को आवश्यकता है की पूर्ति हेतु अधिक से अधिक वस्तु विनिमय प्रणाली का उपयोग करें यह वस्तु विनिमय प्रणाली वही वस्तु विनिमय प्रणाली है जिसका उपयोग प्राचीन समय के लोग मुद्रा के अभाव में करते थे परंतु वर्तमान समय में हालांकि वस्तु विनिमय प्रणाली समाप्त हो चुकी है परंतु इस संकट की घड़ी में वही प्राचीन वस्तु विनिमय प्रणाली अधिक से अधिक उपयोग में लाई जानी चाहिय क्योंकि भारत कृषि प्रधान देश है भारत जिसमें कई छोटे और बड़े कस्बे हैं जहां पर लोगों की मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति में कहीं ना कहीं कोई ना कोई त्रुटि है कोई ना कोई समस्या है इसका समाधान हम सबको मिलकर निकालना चाहिए सब को एक दूसरे के साथ वस्तुओं के मूल्य के अनुसार वस्तु विनिमय प्रणाली का उपयोग करना चाहिए और उसका उपयोग भी पूर्ण रूप से सरकार द्वारा बनाए गए नियमों के उल्लंघन के बिना किया जाना चाहिए और कोरोना वायरस के संक्रमण से होने वाले खतरे की सावधानी को मध्यनजर रखते हुए वस्तु विनिमय प्रणाली का प्रयोग किया जाना चाहिए।”

विश्लेषक- Mayank Sharma

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