ज्योतिरादित्य सिंधिया एक चुनोती

Congress Leaders Jyotiraditya Scindia at a party press conference in the capital New Delhi on tuesday. Express Photo by Tashi Tobgyal New Delhi 160517 *** Local Caption *** Congress Leaders Jyotiraditya Scindia at a party press conference in the capital New Delhi on tuesday. Express Photo by Tashi Tobgyal New Delhi 160517

कहा जाता है कि जनता में पकड़ और वरिष्ठता से ही भाजपा में जिम्मेदारी दी जाती है, लेकिन मप्र में भाजपा की सत्ता में यह नियम लागू नहीं होता है। प्रदेश में बीते डेढ़ दशक की सत्ता में तो यही उदाहरण दिखा है। अब प्रदेश में चौथी बार भाजपा की सरकार बन चुकी है और मंत्रिमंडल का गठन होने जा रहा है, जिसकी वजह से एक बार फिर पार्टी के वे विधायक चर्चा में है जो वरिष्ठता के साथ ही इलाके में मजबूत पकड़ रखते हैं। चर्चा में नाम होने के बाद भी इन विधायकों को मंत्रिमंडल में लिया जाने पर संशय बरकरार है, वजह है इनके कोई बड़े आकाओं का न होना। इसके अलावा इस बार प्रदेश मंत्रिमंडल के गठन पर सिंधिया फैक्टर का भी असर पडऩा तय है। इसके चलते भी कई भाजपा के मठाधीशों का शिकार होना तय है। भाजपा में भी अब प्रभावशाली तो दूर सामान्य पद के लिए भी आकाओं के अलावा किस्मत का भी साथ जरुरी हो चुका है।प्रदेश में कई ऐसे भाजपा विधायक हैं जो बीते चार-पांच बार या उससे अधिक बार से विधायक बनते आ रहे हैं, लेकिन अब तक मंत्री नहीं बन सके हैं। मंत्री न बन पाने की कसक उनके मन में है और कई बार यह कसक संगठन की बैठकों में भी सामने आ चुकी है पर अनुशासन के डंडे के डर से वे अपनी इस पीड़ा का इजहार भी नहीं कर पा रहे हैं। यह वे लोग हैंं जो उपेक्षित होने के बाद भी अभी भी पार्टी लाइन पर ही पूरी तरह से चल रहे हैं। इस बार वे मौका चाहते हैं, लेकिन वे खामोशी तोडऩे को फिर भी तैयार नही हैं। इतना जरुर कहते हैं कि संगठन संगठन जो तय करेगा वह सर्वोपरि होगा। भाजपा में ऐसे एक दर्जन विधायक हैं जो पिछले चार बार या उससे अधिक बार से चुनाव जीत रहे हैं, इसके अलावा कई नेता ऐसे हैं जो तीन बार से लगातार निर्वाचित होकर आ रहे हैं पर इन्हें मंत्री पद अब तक नसीब नहीं हुआ। अब तो सिंधिया समर्थक भी उनकी राह का रोड़ा बन रहे हैं।

यह विधायक कर रहे डेढ़ दशक से इंतजार
-नीना वर्मा- पूर्व केन्द्रीय मंत्री और सीनियर भाजपा नेता विक्रम वर्मा की पत्नी। तीन बार से धार से विधायक।
-रमेश मेंदोला- सबसे लंबे मार्जिन से जीतने वाले इंदौर के क्षेत्र क्रमांक दो से विधायक। -शैलेन्द्र जैन- तीन बार से लगातार विधायक। बेहतर वक्ता की छवि।
-प्रदीप लारिया- सागर के पूर्व मेयर, इंजीनियर लारिया भी तीन बार से विधायक हैं। पिछली बार मंत्री पद के लिए नाम चलने के बाद संगठन में उपाध्यक्ष पद ही मिला।
-विजयपाल सिंह- सोहागपुर से तीन बार से विधायक। सीएम के करीबी और चार बार से लगातार विधायक।
-केदारनाथ शुक्ला – चार बार से सीधी से विधायक और योग्यता में किसी से कम नहीं हैं। पार्टी लाइन पर चलने वाले इस नेता का नाम मंत्री पद के लिए कई बार चला पर अंत में निराशा ही हाथ लगी। उनका नाम इस बार भी चर्चा में है।
-गिरीश गौतम- 2003 में रीवा जिले की मनगंवा विस क्षेत्र से कांग्रेस के तत्कालीन दिग्गज और विंध्य के सफेद शेर कहे जाने वाले श्रीनिवास तिवारी को हराकर अपनी पारी शुरू करने वाले गौतम बेवाकी और ईमानदारी के लिए जाने जाते हैं। विंध्य में श्रीनिवास तिवारी को घर बैठाने का श्रेय उनके नाम हैं। चार बार के विधायक होने के बाद भी पार्टी ने अब तक उन्हें मंत्री पद के लायक नहीं समझा। इस बार भी उनका नाम चर्चा में है।
-ओमप्रकाश सकलेचा प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और जनसंघ फिर भाजपा के दिग्गज नेता रहे वीरेन्द्र सकलेचा के पुत्र हैं। वे जावद से लगातार चार बार से विधायक हैं। मंत्रिमंडल में कई नेता पुत्रों को पिछली बार मौका मिला पर सकलेचा उपेक्षित रहे।
-राजेन्द्र पांडेय पूर्व मुख्यमंत्री कैलाश नाथ काटजू को हरा कर राजनीतिक सनसनी फैला देने वाले स्वर्गीय लक्ष्मीनारायण पांडेय के पुत्र हैं। वे भी चार बार से विधायक हैं। उनके पिता के नाम नौ बार सांसद रहने का रिकार्ड है। पिता पद लोालुप नहीं रहे और पूरे समय सिद्धान्तों की राजनीति करते रहे। राजेन्द्र पांडेय को भी भाजपा ने उसी श्रेणी में रखा दिया है। योग्यता के बाद भी वे अब तक मंत्री नहीं बन सके हैं।
-ठाकुरदास नागवंशी पिपरिया से इस बार चौथी बार विधायक हैं। वे किसी भीग गुट में नहीं रहते हैं। वे सिर्फ पार्टी लाइन पर चलते हैं और अपने काम की दम पर ही हर बार चुनाव में जीत हासकल करते हैं। वे भी अब तक मंत्री पद नहीं पा सके हैं।
-यशपाल सिंह सिसौदिया मंदसौर से चौथी बार विधायक बने हैं। उनकी गिनती भाजपा के बेहतर वक्ताओं में होती है। वे संसदीय विषयों के जानकार हैं। सदन में वे कई बार पार्टी का पक्ष प्रमुखता से रखते रहे हैं पर मंत्री बनना अब तक उनके भाग्य में नहीं आया है।
-ऊषा ठाकुर तीन बार की विधायक ऊषा ठाकुर की गिनती भी पार्टी के समर्पित नेताओं में होती है। बीते चुनाव में राजनीति का शिकार बनाकर उन्हें इंदौर से अचानक महू से चुनाव लड़वा दिया गया पर अपनी कर्मशीलता से उन्होंने वहां से भी जीत हासिल कर सभी को चौका दिया। पर अब भी उनका नाम मंत्री पद के लिए इंतजार में ही है।
-गोपीलाल जाटव पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के गृह जिले गुना से छह बार से विधायक हैं। वे पिछली बार से मंत्री बनने की बाट जोह रहे हैं। उनका नाम इस बार मंत्री बनने वालों की सूची में चर्चा में बना हुआ है।

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