कोरोना: 17 लाख प्रवासियों को कहां रखेगी, क्या खिलाएगी बिहार सरकार?

बिहार सरकार के आंकड़ों के मुताबिक़ क़रीब 17 लाख प्रवासी बिहारी मज़दूर, छात्र, कामगार बाहर फँसे हैं. इनमें से कइयों के अब वापस लौटने की संभावना है. कोरोना वायरस के कारण भारत में हुए लॉकडाउन की शुरुआत से ही अन्य राज्यों में फँसे अपने लोगों को वापस बुलाने पर बिहार सरकार का रुख़ नकारात्मक रहा. विपक्ष के लगातार दबाव के बावजूद भी सरकार बाहरी लोगों को बुलाने से इनकार करती रही.

लेकिन अब गृह मंत्रालय की नई गाइडलाइन के बाद बिहार सरकार भी बाहर फँसे अपने लोगों को वापस बुलाने के इंतज़ाम में लगी है. हालांकि, गृह मंत्रालय की गाइडलाइन के बाद भी बिहार सरकार के उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी ने मीडिया में यह बयान दिया था, “इतनी बड़ी संख्या में लोगों को वापस बुलाने के लिए सरकार के पास पर्याप्त संसाधन नहीं है.”

इस पर विपक्ष ने राज्य सरकार की अक्षमता पर सवाल उठाएलाखों लोगों का सवाल है. ज़ाहिर है, मामला इसलिए गंभीर भी है. इस मसले पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सभी विभागों के आला अधिकारियों और मंत्रियों के साथ शुक्रवार को बैठक की थी. इसमें बाहर से आने वाले प्रवासियों को अनिवार्य रूप से 21 दिनों तक क्वारंटीन सेंटर में रखने के लिए पंचायत स्तर पर क्वारंटीन सेंटर के विस्तार की बात फिर से मुख्यमंत्री ने कही.

यह भी कहा कि जीविका और राष्ट्रीय आजीविका मिशन द्वारा चिन्हित लोगों को भी प्रति परिवार एक हज़ार रुपये की सहायता राशि जल्द से जल्द दी जाए. अब सवाल है कि क्या बिहार सरकार के पास इतनी व्यवस्था और इंतज़ाम है कि बाहर से आने वाले लाखों लोगों को 21 दिनों तक क्वारंटीन सेंटर में रख सके और साथ ही इस दरम्यान उन्हें समुचित तौर पर खिला-पिला सके! साथ ही क्या बाहर से आने वाले परिवारों की आजीविका को लेकर भी सरकार ने कुछ प्रबंध किया है?

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